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तुम्हे तकलीफ न हो जरा भी चलने में

लो यह दिल चप्पल की जगह पहन लो

er kasz

पाल ले इक रोग नादाँ ज़िंदगी के वास्ते

सिर्फ़ सेहत के सहारे ज़िंदगी कटती नहीं

तेरे वादे से कहाँ तक मेरा दिल फ़रेब खाये

कोई ऐसा कर बहाना मेरा दिल ही टूट जाये

मिलने की तमन्ना जनाब से पूरी नहीं होती

सों यज्ञ के फासले की दुरी कम नहीं होती

मुझे तो इन्साफ चाहिए बस

दिल मेरा हैं तो मालिक तुम केसे

ना जाने इस ज़िद का नतीज़ा क्या होगा..
समझता दिल भी नहीँ, वो भी नहीँ, मैँ भी नहीँ..

आज सूरज उदास बैठा है

तुम मेरी सुबह हो आ जाओ

पलकों को अब झपकने की आदत नहीं रही

जाने क्या हुआ है तुम्हें देखने के बाद

Ae Ishq Suna Tha Ke Tu Andha Hai

Phir Mere Ghar Ka Raasta Tujhe Kis Ne Bataya

Waqat-e-Rukhsat Ponchh Rha Tha Mere Anso Apne Anchal Se

Usko Gham Tha Itna Ke Woh Khud Roona Bhool Gya

छेड़कर जमानेभर की लड़कियों को रोया वो रातभर

जिस रोज घर उसके बिटिया ने जन्म लिया

जो सच है वो छुपा लेते हो मुझसे

तुम्हे तो अखबार होना चाहिए था

मुझे तो इन्साफ चाहिए बस

दिल मेरा हैं तो मालिक तुम केसे

तू जाहिर है लफ्ज़ों में मेरे

मैं गुमनाम हुँ खामोशियों में तेरी

कहाँ तलाश करोगे तुम मुझ जैसे एक शख्स को

जो तुम्हारे सितम भी सहे और तुम से मोहब्बत भी करे

कौन खरीदेगा अब हीरो के दाम में तुम्हारे आँसु

वो जो दर्द का सौदागर था मोहब्बत छोड़ दी उसने

कितना मुश्किल है मनाना उस शख्स को

जो रूठा भी न हो और बात भी न करे

निगाहों को कहो कि अपनी हद में रहे

इश्क को आदत है आवारा घूमने की

तुम न लगा पाओगे अंदाजा मेरी तबाही का

तुमने देखा नही है मुझको शाम होने के बाद

Saare Zamane Me Taqseem Tum Apna Waqt Karte Ho

Faqat Mere Liye Tumko Koi Lamha Nahi Milta

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