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किसी को मेरे बारे में पता कुछ भी नही

इल्जाम हजारो है और खता कुछ भी नही

नजर से दूर रह कर भी किसी की सोच में रहना

किसी के पास रहने का तरीका हो तो ऐसा हो

ना जाने किस मिट्टी को मेरे वजुद की ख्वाईश थी

मै ईतना तो बना भी ना,,था जीतना मिटा दिया गया हूँ

टुकड़े पड़े थे राह में किसी हसीना की तस्वीर के,

लगता है कोई दीवाना आज समझदार हो गया.

किसके हैं हम बस तुम्हारे ही तो हैं

उन के ये अल्फाज़ झूठे तो थे मगर ग़ज़ब के थे

Use sochna chahiye tha har sitam se pehle

Mai sirf Aashiq hi nahi Insaan bhi tha

हमने खुशियोँ की तिजोरी उनके हवाले की थी,

लेकिन कमबख्त को मेरी हंसी ही चुरानी थी!!

Yeh Sab Rastay Key Saathi Thy,Inhen Akhir Bicharna Tha

Chalo Ab Ghar Chalain Mohsin,Bhat Awargi Kar Li..

कौन कहता है के दिल सिर्फ लफ्ज़ो से दुखाया जाता है..

कभी-कभी ख़ामोशी भी तो बड़ी तकलीफ़ देती है...!!

अच्छा छोड़ो ये बहस और तक़रार की बातें

ये बताओ रात ख़्वाबों में क्यूँ आते हो

ऐ दिल सोजा अब तेरी शायरी पढ़ने वाली

किसी और शायर की गजल बन गयी है

मिलने को यूँ तो हमसे मिले है हजारो

वो शख्स जो सीधा दिल में उतर गया उसका हुनर कमाल था

हाल तो पुंछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी..

ज़ब ज़ब सुनी हें कमबख्त मोहब्बत ही हुई हें...

मानना पड़ेगा मेरी वाली छुपन छुपाई में माहिर है

बरसों से ढूंढ रहा हु अभी तक नही मिली

नजर से दूर रह कर भी किसी की सोच में रहना

किसी के पास रहने का तरीका हो तो ऐसा हो

तुम्हारी वेबफाई ने जीते जी मार डाला

हंसती हुई मेरी जिंदगी को यूं बेजार कर डाला

नशा तब दोगुना होता है

जब जाम भी छलके और आँख भी छलके

er kasz

रात रंगीन हो या कि अंधेरी रात तो रात होती है

दिल खुशी से झूम उठता है जब तू मेरे साथ होती है

Ham Ne Kanton Ko Bhi Bari Narmi Se Chua Hai

Log Kitny Bedard Hain Pholon Ko Masal Dety Hain

रोने की वजह ना थी ना हंसने का बहाना था

क्यों हो गए हम इतने बड़े इससे अच्छा तो वो बचपन का ज़माना था

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