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यही सोचकर कोई सफाई नहीं दी हमने.

कि इल्जाम झूठे भले हैं पर लगाये तो तुमने हैं

जल गया सारा जमाना हम से

जब हमने हर दुऑ मै तेरा साथ मांगा

बहुत कुछ कहना है पर कहूँ भी तो किसे कहूँ

ख़ुद से ही इतना ख़फ़ा ख़फ़ा रहता हूँ आजकल

लगाई तो थी आग उनकी तस्वीर में रात को

सुबह देखा तो मेरा दिल छालो से भर गया

er kasz

उसे मेरी शायरी पसंद आई क्यों की इनमे दर्द था

न जाने क्यों मै पसंद नहीं आया मुझमे उससे ज्यादा दर्द था

दरवाज़ों के शीशे न बदलवा

लोगों ने अभी हाथ से पत्थर नहीं फेंके

वो किसी और की खातिर हमेँ भूल भी गये तो कोई बात नही

कभी हम भी तो भूल गये थे सारा जहाँ उन्ही की खातिर

बागों में फूल खिलते हैं बहार लाने के लिए

हम तुम पे मरते हैं अपना बनाने के लिए

चल ऐ दिल किसी अनजान सी बस्ती में

इस शहर में तुझसे सभी नाराज ही रहते हैं

एक मुकम्मल सी याद बाकी है

एक अधूरे इश्क की

किसी रोज फुर्सत मिले तो आना हमारी महफ़िल में

हम शायरी नहीं दर्द ए इश्क़ सुनाते हैं

सितारे ये ख़बर लाए कि अब वो भी परेशाँ हैं

सुना है उनको नींद आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ

मुझे तो होश नही तुमको खबर हो शायद

लोग कहते है कि तुम ने मुझको बर्बाद कर दिया.

लफ्जो में कुछ यू उलझा हु में

कहीं कंही से हर चेहरा तुम जैसा लगता है

ज़िंदगी मे इससे बढकर रंज क्या होगा

उसका ये कहना की तू शायर है दीवाना नही

खुदा‬ तु भी कारीगर‬ निकला, खीच दी दो-तीन ‪‎लकीरें‬ हाथों में

और ये नादान ‎इंसान‬ उसे तकदीर‬ समझ बैठा

Neend Bhi Nilaam Ho Jaati Hai Baazaar e Ishq Mein

Itna Aasan Nahi Hai Kisi Ko Bhula Kar So Jaana

Aaj phir WO keh gaya ki mai bewafa hu

Par usne hamari deewangi dekhi hi kaha thi

तुम्हारे बाद जो होगी वो दिल्लगी होगी

महोबत तो तुम पे ख़तम कर बेठे है

Silsila khayalon ka toot ta nahi goya

Zehan ke darichon mein khwab ka basera hai

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