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वो कहते हैं बता तेरा दर्द कैसे समझूँ

मैंने कहा इश्क़ कर बहुत कर और करके हार जा

दर्द इतना था ज़िंदगी में कि धड़कन साथ देने से घबरा गयी

आंखें बंद थी किसी कि याद में ओर मौत धोखा खा गयी

दफा हो जा ए महोब्बत मेरी ज़िंदगी से

हंसी हंसी में तूने तो मेरी हस्ती ही मिटा डाली

ग़ज़ब है उसका हंस के नज़र झुका लेना

पूछो तो कहता है कुछ नही बस यूँ ही

सौ दुश्मन बनाए हमने किसी ने कुछ नहीं कहा

एक को हमसफर क्या बनाया सौ ऊँगली उठ गई

सिर्फ एक ही बात सीखी इन हुस्न वालों से हमने

हसीन जिस कि जितनी अदा है वो उतना ही बेवफा है

एक मुकम्मल सी याद बाकी है

एक अधूरे इश्क की

नाराज़ क्यों होते हो चले जाएंगे तुम्हारी महफ़िल से


लेकिन पहले मुझे मेरे दिल के टुकड़े तो उठा लेने दो

ज़ुल्म इतने ना कर के लोग कहे तुझे दुश्मन मेरा..

मैंने ज़माने को तुझे अपना प्यार बता रखा है.

बेइंतहा इश्क़ करने लगे हैं उनसे

इक पल मिलना हमसे जिसे गवारा नहीं

तुम उदार हो इस दुनिया पर इतनी दया दिखा देना

प्रेम भुलाऊ कैसे तुम्हारा इतना मुझे बता देना

कहाँ कहाँ नहीं खोजा तुने एक कतरा सच्ची महोब्बत का

मेरी आँखो में बस ज़रा सा झाँक लेते

तुम्हें देखकर किसी को भी यकीन नही

कि मेरे दिल का ये हाल तुमने ही किया है

er kasz

फिर नहीं बस्ते वो दिल जो एक बार उजड़ जाते हैं,

कब्रे जितनी भी सजा लो, कोई ज़िंदा नहीं होता .

मुझे मिल गई है मुहब्बत की मंजिल

कोई पूछ ले मेरे हम सफ़र से

वक़्त की रफ़्तार कभी बदलती नहीं

बस ज़िन्दगी की रफ़्तार बदल जाती है

तुम्ही ने लगा दिया इल्जाम ए बेवफाई मुझ पर

मेरे पास तो वफ़ा के गवाह भी सिर्फ तुम ही तो थे

ऐसा नहीं की अब तेरी जरूरत नहीं रही,

बस टूट के बिखरने की अब हिम्मत नहीं रही…

नाराज़ क्यों होते हो चले जाएंगे तुम्हारी महफ़िल से

लेकिन पहले मुझे मेरे दिल के टुकड़े तो उठा लेने दो

Aagaz e Ishq bhi Khub tha Ghalib kya kahun

Pehle to thi dil lagi phr dil ko ja lagi

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