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तेरी एक झलक में हम खुद को भूला बैठे कसम से

रोज़ तु आईने में खुद को कैसे देखती होगी

दीदार-ए-यार की खातिर जिन्दा हूँ ग़ालिब

वर्ना कौन जीता है इस दुनिया में तमाशा बन कर

सेल्फी तो मिनटों में बनती है

वक्त तो image बनाने में लगता है

LaBh sE aGaR bAat nhi kR sKte toh

AAnkhon hi aAnkhon mE bAat hOnE dO

एक ख़त कमीज़ में उसके नाम का क्या रखा

क़रीब से गुज़रा हर शख़्श पूछता है कौन सा इत्र है जनाब

Phir jaag utha hai dil me purane dilon ka dard

Jee chahta hai phir koi taaza ghazal kahoon

राज ज़ाहिर ना होने दो तो एक बात कहूँ

मैं धीरे धीरे तेरे बिन मर जाऊँगी

hum wo hain jo haar k bhi yeh khte hain

woh manzil hi badnaseeb thi jo hme na paa ski

काश मै लौट पाऊँ बचपन कि उन गलियों में

जन्हा ना कोई ज़रूरी था ना कोई जरूरत

ये सोच कर तेरी महफ़िल में चला आया हूँ

तेरी सोहबत में रहूँगा तो संवर जाऊंगा

अगर किसी दिन रोना आये,
तो कॉल करना,

हसाने की गारंटी नही देता हूँ,
पर तेरे साथ रोऊंगा जरुर

बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं

अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती

सारी दुनिया की खुशी अपनी जगह

उन सबके बीच तेरी कमी अपनी जगह

ना मिल रहा है तू ना खो रहा है तू

बहुत दिलचस्प हो रहा है तू

जिंदगी तो उसकी है जिसकी मौत पे जमाना अफसोस करे

वरना जनम तो हर किसी का मरने के लिए ही होता है

तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे

मगर अब आँख भर आती है तुम नजर नही आते हो

ढूंढते हो क्या इन आँखों में कहानी हमारी

खुद में ग़ुम रहना तो आदत है पुरानी हमारी

तेरी तस्वीर की तारीफ करने से भी डरता हूँ

जमाना जान न जाए मुझे तु अच्छी लगती है

दोस्तों कह देना पगली से दिल की ज़िद हो तुम ऐ बेखबर

वरना बहुत सी हसींना देखी हैं इन आँखों ने भी

जीत हासिल करनी हो तो काबिलियत बढाओ

किस्मत की रोटी तो कुत्ते को भी नसीब होती है

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