वो लफ्ज कहां से लाऊं जो तेरे दिल को मोम कर दें;
मेरा वजूद पिघल रहा है तेरी बेरूखी से.
"दर्द" वो है, जो दूसरों को दर्द में देखकर महसूस हो वरना
अपना दर्द तो जानवरों को भी महसूस होता है...!
अगर किसी दिन रोना आये,
तो कॉल करना,
हसाने की गारंटी नही देता हूँ,
पर तेरे साथ रोऊंगा जरुर
हकिकत से बहोत दूर है ख्वाहिश मेरी
फिर भी एक ख्वाहिश है कि एक ख्वाब हकिकत हो
शायर बना दिया अधूरी मोहब्बत ने
मोहब्बत अगर पूरी होती तो हम भी एक ग़ज़ल होते
मुझे ढूंढने की कोशिश न किया कर पगली
तूने रास्ता बदला मैंने मंज़िल ही बदल दी
इतना भी हमसे नाराज़ मत हुआ करो
बदकिस्मत ज़रूर हैं हम मगर बेवफा नहीं
नज़र-नज़र का फर्क है हुस्न का नहीं
महबूब जिसका भी हो बेमिसाल होता है
मरने का मज़ा तो तब है
जब कातिल भी जनाजे पे आकर रोये
अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफिला दिल का…
सुकून ढूंढने निकले थे, नींदे भी गँवा बैठे…!!!
आज सूरज उदास बैठा है
तुम मेरी सुबह हो आ जाओ
Kisi Ghareeb Qabeely Ki Aabroo Ki Tarha...
Hamara Dard Bhi Kisi Dard Main Shumaar Nahi
डूबी हैं उगंलिया अपने ही लहू मे
ये कांच के टुकड़ों पर भरोसे की सजा है
LaBh sE aGaR bAat nhi kR sKte toh
AAnkhon hi aAnkhon mE bAat hOnE dO
बच न सका ख़ुदा भी मोहब्बत के तकाज़ों से
एक महबूब की खातिर सारा जहाँ बना डाला
बगैर जिसके एक पल भी गुजारा नही होता
सित्म देखिए वही शक्स हमारा नही होता
वो अक्सर देता है मुझे मिसाल परिंदों की
साफ़ साफ़ नहीं कहता के मेरा शहर छोड़ दो
तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले हैं .
पूछो उन रातों से जो रोज़ कहती हैं खुदा के लिए आज तो सो जाओ..!!
एक तुझे पा लेने के बाद
किसी और की ख्वाहिश का सवाल ही नहीं उठता
मत पूछ दास्तान ऐ इश्क
जो रूलाता है, उसी के गले लगकर रोने का मन करता है
