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खत लिखती हूं मै आपको नीली स्याही से

फट जाता है कलेजा मेरा आपकी जुदाई से

फूल जो तुमने दिया, वह प्रेम की पहचान है

फूल की तुम जान हो, वह फूल मेरी जान है

आज भी कितना नादान है दिल समझता ही नहीं

बरसों बाद भी उनको देखा तो दुआएँ मांग बैठा

मेरे दिल से उसकी हर गलती माफ़ हो जाती है

जब वो मुस्करा के पूछती है नाराज़ हो क्या

Mujhe pyaar kitna hai is bholepan se

Batau mai kaise sanam se sanam se

मेरे सपनों में तुम क्यों रोज-रोज आती हो

सोया होता हूं नींद में जब तो क्यों तुम जगाती हो

किस के हैं हम बस तुम्हारे ही तो हैं

उन के ये अल्फाज़ झूठे तो थे मगर ग़ज़ब के थे

Hasne ko chand lamhe, rone ko umar sari

agar hai manjur to karlo ishq se yaari

वफा की राहों में सनम मेरी मंजिल है

सारे जहां से अच्छा, तू मेरी संगदिल है

एक तुझे पा लेने के बाद

किसी और की ख्वाहिश का सवाल ही नहीं उठता

प्यार का सपना सजाके हमें अपना बनाया तुमने

नजर मिलाते मिलाते मेरे दिल को भी चुराया तुमने

तू मुहब्बत से कोई चाल तो चल

हार जाने का हौसला है मुझ में

Aagaz e Ishq bhi Khub tha Ghalib kya kahun

Pehle to thi dil lagi phr dil ko ja lagi

मेरे गले में डाल रही हो तुम बाहों का हर

तुम तो लाई हो मेरे जीवन में बहार

जिसको आज मुझमें हज़ारों गलतियां नज़र आती है

कभी उसी ने कहाँ था तुम जैसे भी हो मेरे हों

इन कागजो पर लिखे अल्फाज भी ढेर हो जाएँ

जो मै एक गजल अपने लबों से तेरे गाल पर लिख दूँ

बेसबब नही था मुस्कराना उसका

मगर हँसती थी मेरे अँदाज-ए-इश्क पर

पाल ले इक रोग नादाँ ज़िंदगी के वास्ते

सिर्फ़ सेहत के सहारे ज़िंदगी कटती नहीं

रात देर तक तेरी देहलीज़ पर बैठी रही ऑंखें मेरी

खुद न आना था तो कोई ख्वाब ही भेज दिया होता

Boy proposed a girl- she rejected He was not sad Friends asked Y U dont feel

Boy- Y should i feel I lost 1 who never loved me she lost 1 who really love her

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