मत पूछ दास्तान ऐ इश्क
जो रूलाता है, उसी के गले लगकर रोने का मन करता है
किसी के दिल में क्या छुपा है ये बस खुदा ही जानता है
दिल अगर बेनकाब होता तो सोचो कितना फसाद होता
तेरी तवज्जुह शायद मेरे नसीब में ही ना थी
छोड़ दिया तुझे याद करना खुद को बेवफा समझ कर
हुस्न वाले जब तोड़ते है दिल किसी का...
बड़ी सादगी से कहते हैं मजबूर थे हम . . .
ना जाने इस ज़िद का नतीज़ा क्या होगा..
समझता दिल भी नहीँ, वो भी नहीँ, मैँ भी नहीँ..
अपनी जवानी में और रखा ही क्या है कुछ तस्वीरें यार
की बाकी बोतलें शराब की
इतना भी प्यार किस काम का.
भूलना भी चाहो तो नफरत की हद्द तक जाना पड़े.
हाथ की लकीरें पढने वाले ने तो मेरे होश ही उड़ा दिये
मेरा हाथ देख कर बोला तुझे मौत नहीं किसी की चाहत मारेगी
er kasz
कितने आसान से लफ़्ज़ों में कह गया वो..
के बस दिल ही तोडा है कोनसी जान ली है..
मैंने ये सोचकर उसकी सारी बातो को सच मान लिया की
ईतनी अच्छी है तो झुठ कैसे बोलेगी
अपने उसूल कभी यूँ भी तोड़ने पड़े खता उसकी थी
हाथ मुझे जोड़ने पड़े
लाख समझाया उसको कि दुनिया शक करती है
मगर उसकी आदत नहीं गई मुस्कुरा कर गुजरने की
मैं कोई छोटी सी कहानी नहीं था
बस पन्ने ही जल्दी पलट दिए तुम नें
दोस्ती का इरादा था प्यार हो गया
दोस्तो अब दुआ दीजिये सलाह नही
er kasz
उसका वादा भी अजीब था कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे
मैंने भी ये नहीं पुछा की मोहब्बत के साथ या यादों के साथ
खुल जाता है उनकी यादो का बाजार हर शाम
फिर अपनी रात उसी रौनक मेँ गुजर जाती है
er kasz
दिल की बातें जाकर के दिलदार को बताती
बड़ी ही खूबसूरती से अपनी ओकात छुपाती है
Roj Dhalta hua suraj teri yadd ki yadd dilata hai
Ke bhul mat oh musafir kal phir milna hai
Tanhayi Ke Aatishdaan Me Main Lakri Ki Tarah Jalta Tha
Tere Saath Tere Hamraahi Mere Saath Mera Rasta Tha
किसी के दिल में क्या छुपा है ये बस खुदा ही जानता है
दिल अगर बेनकाब होता तो सोचो कितना फसाद होता
