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"दिन तो कट जाता है शहर की रौऩक में

पर कुछ लोग बहुत याद आते हैं शाम ढल जाने के बाद

यारों से गले मिलती हो बाहों का हार बनकर

आ जाओ हमसे मिलने कांटों का हार बनकर

तुमने कहा था आँख भर के देख लिया करो मुझे

मगर अब आँख भर आती है तुम नजर नही आते हो

चीखता चिल्लाता एहसास बे आवाज़ हो गया है

प्यार अब प्यार ना रहा रिवाज़ हो गया है

उसकी दर्द भरी आँखों ने जिस जगह कहा था अलविदा

आज भी वही खड़ा है दिल उसके आने के इंतज़ार में

न जाने क्यूँ ये रात उदास कर देती है हर रोज

महसूस होता है जैसे भूल रहा है कोई धीरे धीरे

पता नहीं अब हक़ है भी या नहीं...
पर तेरी परवाह करना मुझे आज भी अछा लगता है...

किस कदर दर्द सेहता होगा वो सख्स

जिसे अहसास हो अब ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं रही

हमें रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि

रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ

किसी रोज फुर्सत मिले तो आना हमारी महफ़िल में

हम शायरी नहीं दर्द ए इश्क़ सुनाते हैं

बहकते हुए फिरतें हैं कई लफ्ज़ जो दिल में

दुनिया ने दिया वक़्त तो लिखेंगे किसी रोज़

कुछ पल के लीये ही मुझे अपनी बाहों में सुला लो

अगर आँख खुली तो उठा देना अगर ना खुली तो दफ़ना देना

दिल दिया है तो दिल मिला भी होगा किसी से

क्यों इश्क में हिसाब किए फिरते हो

तू जाहिर है लफ्ज़ों में मेरे

मैं गुमनाम हुँ खामोशियों में तेरी

कौन कहता है कि मैं खूबसूरत लिखता हूँ ??

खूबसूरत तो वो लोग है जो इसे पसन्द करते हैं !!

वो भी जिन्दा है मै भी जिन्दा हूँ

कत्ल तो सिर्फ इश्क का हुआ है

एक मुकम्मल सी याद बाकी है

एक अधूरे इश्क की

बीत जाती है जिसकी पूरी रात सिसकियों में,

वो शख्स दिन के उजालों में सारे जहाँ को हँसाता फिरता हैं...!!

वो बेईमान नेता सी है हर दिल से खेलती है

मै भोली जनता सा हूँ हर बार उसी को चुनता हुँ

सबसे आवश्यक चीज है कि आप अपने जीवन का आनंद लें

खुश रहे बस यही मायने रखता है

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