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ए इश्क़ तुझसे दिल की बात कहूँ तो बुरा तो नही मानोगे..

बहुत चैन के दिन थे तेरी पहचान से पहले..

कैसे कह दूँ तुमसे हमें मोहब्बत नहीं

मुंह से निकला झूठ एक दिन आँखों से पकड़ा जायेगा

बर्बाद कर के मुझे उसने पूछा करोगे फिर मुहब्बत मुझसे

लहू लहू था दिल मगर होंठों ने कहा इंशा अल्लाह

अक्श हर शख्स मे उसी का दिखाई देगा तुम्है

चाहते हो हर-पल हर-लम्हा जिसे

कुछ भी नहीं मिलता खैरात में यहाँ
भीख भी देता हैं इंसान तो कम करने को अपने गुनाह ॥

बदन समेट के ले जाए जैसे शाम की धूप

तुम्हारे शहर से मैं इस तरह गुजरता हूँ

में अक्सर अकेला रेह जाता हूँ

क्युकी में हमेश उनके सहारे रेहता हूँ

er kasz

अगर होता है इत्तेफाक़ तो यूँ क्यों नहीं होता

तुम रास्ता भूलो और मुझ तक चले आओ

इतनी नफ़रत साफ़ बता रही है दोस्त

के मुहब्बत तो गज़ब की थी

पूछते हैं सब लोग तुम इतनी अच्छी शायरी कैसे करते हो ,,

तो मुस्कुरा कर कहता हूँ सब कमाल उस जालिम के दर्द का है ....

हसरत तो थी कि तेरी आँख का आसूँ बन जाऊं

पर तू रोये ये मुझे गँवारा नहीं

दिल जाली के यहाँ तुम आना जाना छोड़ दो

गिर पड़ेगी बिजलिया यू मुस्कुराना छोड़ दो

सुना है आज बिक रहा है इश्क़ बाज़ार में

जाओ उस इश्क़ फरामोश से पूछो वफ़ा भी साथ देता है क्या

तेरी तस्वीर की तारीफ करने से भी डरता हूँ

जमाना जान न जाए मुझे तु अच्छी लगती है

Soch raha hun ab bewafa hone ka tarika seekh lun

Muhabbat de de ke hum ne apni qadr kho di

मुस्कुरा के देखो तो सारा जहाँ रंगीन है

वर्ना भीगी पलकों से तो आईना भी धुंधला दिखता है

er kasz

सजा देनी हम को भी आती है ओ बेखबर

पर तू तकलीफ़ से गुजरे ये हमें गवारा नही

जितना Attitude तुम अपनी सारी जिंदगी में नही कमा पाओगी

पगली उतना तो हम अपने पैग में घोल कर पी जाते हैं..

मेरे किरदार का फैसला मेरे लफ़्ज़ो से न करना

क्योंकी मैं लिखती वही हूँ जो तुम लिखवाते हो

वो मिल जाए मुझे तो यू समझूंगा

के जन्नत का एलान हो गया किसी गुनाहगार के लिए

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