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मुददतों से तू पी रहा है यह ज़हर दर्द का

मौत तुझे ऐ दिल फिरभी क्योँ नहीं आती

हकिकत से बहोत दूर है ख्वाहिश मेरी

फिर भी एक ख्वाहिश है कि एक ख्वाब हकिकत हो

मेरी मुस्कराहटें इस कदर जो तुमको चुभ रही है

देख लेना एक दिन रो पड़ोगे मेरी खामोसी जब तुम्हारा इम्तहा लेगी

रहता तो नशा तेरी यादों का ही है

कोई पूछे तो कह देता हुँ पी रखी है

चलो छोड़ो तुम्हें क्या बताना मुहब्बत के दर्द को

जान जाओगे तो जान से जाओगे

एक साल लगती है, एक पल की जुदाई

ऐसा लगता है खा जाएगी, बिरह की परछाई

शायरों ने इसे लफ़्ज़ों से सजा रखा है

वरना मोहोब्बत इतनी भी हसीन नहीं होती

एक तो ये गर्मी और एक तुम

दोनो बहनें हो क्या जो इतना सताती हो हमे

मैं तुमसे अब दिल लगा तो बैठा हूं ......
अब ज़िन्दगी कट जाएगी मोहब्बत का इज़हार करने में !

वक़्त खराब है तो झुकता जा रहा हूँ

जब दिमाग खराब होगा तो हिसाब पल पल का लूँगा

Us Ki Aankhoon Main Nazar Aata Hai Saara Jahan

Mujh Ko Afsoos K Un Aankhoon Main Kabhi Khud Ko Nahi Daikha…

Laut aayi hain barishein fir se yahan wahan

Ek tumhi KO laut k aane ki fursat nahi mili

Nahi Ishq Ka Dard Lazzat Se Khaali

Jissay Zouq Ha Wo Maza Janta Hai

Kadam Ruk Se Gaye Hain Phool Biktey Dekh Kar Woh

Aksar Kaha Krta Tha Muhabbat Phool Jaisi Hai

अगर मेरी चाहतो के मुताबिक जमाने में हर बात होती

तो बस मै होता वो होती और सारी रात बरसात होती

छोड़ तो दिया मुझे पर कभी ये सोचा है तुमने

अब कभी झूँठ बोला तो कसमें किसकी खाओगी

चलते रहेंगे क़ाफ़िले मेरे बग़ैर भी यहाँ

एक तारा टूट जाने से फ़लक़ सूना नहीं होता

प्यार जिंदगी है मगर सच्चा प्यार कहाँ मिलता है


इस मतलबी जहां में सच्चा दिलदार कहाँ मिलता है

लफ्जो में कुछ यू उलझा हु में

कहीं कंही से हर चेहरा तुम जैसा लगता है

बेवफाई के सितम तुमको भी समझ आ जाते

काश होता अगर तुम जैसा तुम्हारा कोई

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