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तू जाहिर है लफ्ज़ों में मेरे

मैं गुमनाम हुँ खामोशियों में तेरी

तू एकबार मेरी निगाहो मे देख कर कह दे कि हम

तेरे काबिल नहीं कसम तेरी चलती साँसो की हम तुझे देखना तक छोङ देँगेँ

भूल जाना तुम मुझे पर ये याद रखना

तेरी रूह रोयेगी जब कोई मेरा नाम लेगा

Kitna Dilchasp Hai Izhar e Mohabbat Us Ka

Apni Tasweer Saja Di Meri Tasweer K Sath

Ab Bus Bhi Kar Dy Logon Ko Toot Kar Chahna

Wo Daikh Aik or Shakhs Tujhy Chor Kar Ja Raha Hai

में अक्सर अकेला रेह जाता हूँ

क्युकी में हमेश उनके सहारे रेहता हूँ

er kasz

हाथ की लकीरें भी कितनी अजीब हैं

हाथ के अन्दर हैं पर काबू से बाहर होती है

is Simt Bhi Dekhoun, Nazar Aata Hain Kay Tum Ho

Ae Jaan-E-Jahan,Yeh Koi Tumsa Hain Kay Tum Ho

वो वाकिफ है मेरी बुज़दिली से इसी लिये ये सितम करता है

वो जानता है मौत से ये शक्स डरता नही पर उसके दूर जाने से डरता है

Hai Nisf E Shub Wo Dewana Abhe Tak Ghar Nahe Pahuncha,

Kisi Say Chandni Ratoon Ka Qisa Chirr Gaya Ho Ga

अरे तुम भी निकले हो वफ़ा की तलाश में

यकीन मानो नही मिलती नही मिलती नही मिलती

कोई दावत तो उसे दे आए जाकर जनाज़े में मेरे शरीक़ होने की

आखिरी सफर में ही सही हमसफ़र बनाने की आरज़ू तो पूरी हो

वो अजनबी फिर से ख़ास हो रहा है,
लगता है फिर से प्यार हो रहा है..!!

मेरी मोहोब्बत को ठुकरा दे चाहे,
मैं कोई तुज़से ना शिकवा करुन्गा,

आंखो मे रेहती है तस्वीर तेरी,
सारी उमर तेरी पूजा करुन्गा...

जिस जिस को मिली खबर सबने एक ही सवाल किया

तुमने क्यों की मुहब्बत तुम तो समझदार थे

मोहब्बत मे सर को झुका देना कोई मुश्किल नही

रोशन सूरज भी चाँद की खातिर डूब जाता है

लफ्जो में कुछ यू उलझा हु में

कहीं कंही से हर चेहरा तुम जैसा लगता है

खुद को खोने का पता नहीं चला

किसी को पाने की यूँ इन्तहा कर दी मैंने

कुछ लोग मेरी शायरी से सीते हैं अपने जख्म

कुछ लोगों को मैं चुभता हूँ सुई की नोक के जैसे

टूट सा गया है मेरी चाहतो का वजूद,

अब कोई अच्छा भी लगे तो हम इजहार नही करते

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