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Teri Bahho Mai Aakar Sakoon Milta Hai Mujhe

Kaya Meri Tarah Yoon Hi Bekarar Ho Tum..

हम तो सोचते थे कि लफ्ज ही ‪चोट‬ करते है

पर कुछ खामोशियो के ‪जख्म‬ तो और भी गहरे निकले

"पास मेरे अल्फ़ाज़ों की कोई कमी नही हैं !
पर क्या करूँ फितरत ही जरा खामोश सी हो गयी हैं !!"

तड़प उठता हूँ दर्द के मारे

ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है

मौत से ज्यादा वफादार नहीं कोई

आएगी एक दिन और सदा के लिए

रातों को ख्वाबों में दिल में समा जाती हो तुम

सुबह होते ही फिर क्यों चली जाती हो तुम

जिस्म की बात नही थी उनके दिल तक जाना था

लम्बी दूरी तय करने में वक़्त तो लगता है

अरे तुम भी निकले हो वफ़ा की तलाश में

यकीन मानो नही मिलती नही मिलती नही मिलती

स्याही थोड़ी कम पड़ गई

वर्ना किस्मत तो अपनी भी खूबसूरत लिखी गई थी

Unhe Ye Zidd Kimujhe Dekhkar Kisi Ko Na Dekh

Mera Ye Shouk Ki Sabse Salaam Karaata Chalu…

गरूर तो नहीं करता लेकिन इतना यक़ीन ज़रूर है..
कि अगर याद नहीं करोगे तो भुला भी नहीं सकोगे.!!!

किस गुनाह की दिलवर दे रहे हो मुझे सजा

दिल तोड़ के हमसे रूठ के बैठे हो क्यूं हो तुम मुझसे खफा

है इश्क सलामत तो चला आयेगा कोई

गर तुम नहीं तुमसा हमें मिल जायेगा कोई

चल ऐ दिल किसी अनजान सी बस्ती में

इस शहर में तुझसे सभी नाराज ही रहते हैं

मगरूर हमें कहती है तो कहती रहे दुनिया

हम मुड़ कर पीछे किसी को देखा नहीं करते

कुछ पल खामोशियों में खुद से रूबरू हो लेने दो यारों

ज़िन्दगी के शोर में खुद को सुना नहीं मुद्दतों से मैंने

Aaj bhi isi soch mein gum hai ungliyaan meri

Ke Naya haath usne thama kaise hoga

बड़ी मुश्किल से सुलाया है ख़ुद को मैंने

अपनी आंखों को तेरे ख़्वाब क़ा लालच देकर

Use sochna chahiye tha har sitam se pehle

Mai sirf Aashiq hi nahi Insaan bhi tha

पानी में तैरना सीख ले मेरे दोस्त

आँखों में डूबने वालों का अन्जाम बूरा होता है

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