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जल गया सारा जमाना हम से

जब हमने हर दुऑ मै तेरा साथ मांगा

सुना है आज बिक रहा है इश्क़ बाज़ार में

जाओ उस इश्क़ फरामोश से पूछो वफ़ा भी साथ देता है क्या

वो अजनबी फिर से ख़ास हो रहा है,
लगता है फिर से प्यार हो रहा है..!!

किसी रोज रोशन मेरी भी जिंदगी होगी

इंतजार सुबह का नही किसी के लौट आने का है

मेरे हिस्से में न आयेगी कभी दिलदार की खुशिया

कुछ सख्स फकत शायरी करने के लिए ही पैदा होते है

मोहब्बत ज़िन्दगी बदल देती है

मिल जाए तब भी ना मिले तब भी

अभी तक ‪याद‬ कर रहे हैं ‪‎पागल‬ हैं हम कसम से

उसने तो हमारे बाद भी ‪हजारों‬ भुला दिए

अब इतना भी सादगी का जमाना नही रहा

की तुम वक़्त गुजारो और हम प्यार समझें

कहीं तो दर्द होगा कोई सीने में ज़रूर

यूँ ही हर एक तनहा शायर नहीं होता

में अक्सर अकेला रेह जाता हूँ

क्युकी में हमेश उनके सहारे रेहता हूँ

er kasz

Kitna Dilchasp Hai Izhar e Mohabbat Us Ka

Apni Tasweer Saja Di Meri Tasweer K Sath

तुझे जमाने का डर है मुझसे बात न कर

दिल में कोई और है तो मुझसे बात न कर

Dum tod rahy parinde ko pani tak na diya gaya

Aur ab wo parinde ko bewafa kah rahay hain

मेरी लिखी किताब मेरे ही हाथो मे देकर वो कहने लगी

इसे पढा करो मोहब्बत सीख जाओगे

er kasz

तुम छोड़ गये मुझको पर मैं बदल ना पाया आदतें

बस तुम्हें ही सोचना तुम्हें ही चाहना मेरा आज भी जुनून है

तुम एक महँगा खिलौना हो और मै एक गरीब का बच्चा

मेरी हसरत ही रहेगी तुझे अपना बनाने की

हम तो सोचते थे कि लफ्ज ही ‪चोट‬ करते है

पर कुछ खामोशियो के ‪जख्म‬ तो और भी गहरे निकले

मालूम नहीं क्यूँ मगर कभी कभी

अल्फाजों से ज्यादा मुझे तेरा नाम लिखना अच्छा लगता है

चन्द लम्हें जो गुज़ार आया हूँ अंजानो के साथ

दिल नहीं लगता मेरा अब जाने पहचानों के साथ

er kasz

किसी की यादों में नही लिखता हूँ

हाँ लिखता हूँ तो किसी की याद जरूर आती है

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